धारा 147A पर बड़ा विवाद: दो हाई कोर्ट ने रद्द की, सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे

धारा 147A पर बड़ा विवाद: दो हाई कोर्ट ने रद्द की, सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे

इनकम टैक्स के जिन मामलों को 1 अप्रैल 2021 के बाद दोबारा खोला गया (reassessment), उन पर अभी धारा 147A को लेकर बड़ा कानूनी सवाल है। दो हाई कोर्ट इसे असंवैधानिक बता चुके हैं और अंतिम फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है।

विवाद की शुरुआत

1 अप्रैल 2021 से reassessment की नई व्यवस्था (धारा 148A) लागू हुई। 29 मार्च 2022 को धारा 151A के तहत e-Assessment of Income Escaping Assessment Scheme, 2022 आई, जिसमें नोटिस faceless तरीके से जारी होने थे। लेकिन धारा 148A और 148 के सभी नोटिस Jurisdictional Assessing Officer (JAO) ने जारी किए। कई हाई कोर्ट ने इन नोटिसों को रद्द किया, जबकि कुछ ने इन्हें सही माना।

धारा 147A में क्या है?

Finance Act, 2026 (Act No. 4 of 2026) से धारा 147A जोड़ी गई और 1 अप्रैल 2021 से लागू की गई। यह कहती है कि किसी भी कोर्ट के फ़ैसले, आदेश या डिक्री, और धारा 151A या उसकी scheme में कुछ भी हो, उसके बावजूद धारा 148 और 148A के लिए Assessing Officer का अर्थ NFAC या धारा 144B(3) की assessment unit के अलावा अधिकारी है, और हमेशा से यही माना जाएगा। यानी JAO के नोटिस सही माने जाएँगे। Income-tax Act, 2025 की धारा 279 में भी ऐसा ही संशोधन हुआ।

अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ITO बनाम तेज प्रताप सिंह मामले में ऐसे हाई कोर्ट फ़ैसले रद्द कर मामले वापस भेजे, करदाताओं को धारा 147A को चुनौती देने की छूट दी और कार्यवाही पर रोक लगाई।

हाई कोर्ट के फ़ैसले

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने 10 सितंबर 2026 को ज्योति सरीन बनाम भारत सरकार मामले में धारा 147A को असंवैधानिक बताया। कोर्ट के अनुसार पिछली तारीख़ से लागू कानून तभी सही है जब वह उस कमी को दूर करे जो अदालतों ने बताई थी, जबकि धारा 151A की scheme नहीं बदली गई।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को बाला श्रीनिवास राव सोमिसेट्टी बनाम ITO मामले में भी यही माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि Income-tax Act, 1961 का 1 अप्रैल 2026 को निरसन हो चुका था, इसलिए उसके बाद उसमें संशोधन नहीं हो सकता था।

सुप्रीम कोर्ट का स्टे

18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के फ़ैसले पर स्टे लगाया, इस शर्त पर कि अपील के अंतिम निपटारे तक assessment की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी। अंतिम सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को होगी।

असर

1 अप्रैल 2021 के बाद JAO द्वारा खोले गए केसों का भविष्य अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर टिका है। अपने केस के लिए CA या वकील से सलाह लें।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। कोई त्रुटि दिखे तो हमें बताएँ, हम सुधार करेंगे।

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