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स्वामी विवेकानंद के 8 प्रेरक विचार और उनका अर्थ

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स्वामी विवेकानंद भारत के उन महापुरुषों में से हैं जिनके विचार आज भी युवाओं में जोश भर देते हैं। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था और उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस थे। 11 सितंबर 1893 को शिकागो की विश्व धर्म महासभा में दिए उनके भाषण ने पूरी दुनिया को भारतीय दर्शन से परिचित कराया। 1 मई 1897 को उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। 4 जुलाई 1902 को बेलूर मठ में उनका निधन हुआ। उनकी जयंती 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। 1. उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए यह वाक्य कठोपनिषद से लिया गया है और विवेकानंद ने इसे घर-घर तक पहुँचाया। अर्थ: आलस छोड़ो, लक्ष्य तय करो और बीच में हार मत मानो। 2. एक विचार लो, उसे अपना जीवन बना लो अर्थ: सफलता के लिए एक लक्ष्य पर पूरा ध्यान लगाना ज़रूरी है। मन को कई दिशाओं में भटकने मत दो। 3. जब तक खुद पर विश्वास नहीं, तब तक भगवान पर विश्वास नहीं अर्थ: आत्मविश्वास ही हर काम की नींव है। जो खुद पर भरोसा नहीं करता, वह किसी काम को पूरे मन से नहीं कर सकता। 4. ब्रह्मांड की सारी शक...