किस सरकार में बने कौन से PSU

किस सरकार में बने कौन से PSU

PSU यानी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, वे कंपनियाँ जिनमें सरकार की बड़ी हिस्सेदारी होती है। बिजली, इस्पात, तेल, बैंक, रेल और रक्षा जैसे क्षेत्रों में देश की रीढ़ इन्हीं कंपनियों ने तैयार की। आज देश में 380 से ज़्यादा केंद्रीय PSU हैं। यहाँ कुछ बड़े PSU की चुनिंदा सूची है कि वे किस सरकार के समय बने।

कांग्रेस सरकारों के समय

नेहरू युग (1947–64) में SBI, LIC, ONGC, BEL, इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान स्टील समेत 20 से ज़्यादा बड़े PSU बने। 1964 में HAL, BHEL और BEML बने। 1965 में अनाज की ख़रीद और भंडारण के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) बना। 1969 में इंदिरा गांधी सरकार ने 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। 1973 में SAIL और 1975 में कोल इंडिया, NTPC और NHPC बने। 1981 में NALCO और मारुति उद्योग, 1984 में GAIL, 1986 में MTNL, 1988 में CONCOR और 1989 में पावर ग्रिड बने। मनमोहन सिंह सरकार के समय 2006 में IIFCL और मालगाड़ियों के लिए अलग रेल लाइन बनाने वाली DFCCIL, और 2012 में गाँवों तक इंटरनेट पहुँचाने वाली BBNL (भारतनेट) बनी।

भाजपा (NDA) सरकारों के समय

वाजपेयी सरकार के समय 1999 में IRCTC और 2000 में BSNL व RailTel बने। मोदी सरकार के समय 2014 में सड़कों के लिए NHIDCL, 2016 में बुलेट ट्रेन के लिए NHSRCL और बंदरगाहों के लिए सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी बनी। 2019 में अंतरिक्ष क्षेत्र की कंपनी NSIL बनी। 2021 में पुराने आयुध कारखानों (ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड) को 7 नए रक्षा PSU में बदला गया और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कर्ज़ देने वाला बैंक NaBFID बना। 2022 में सरकारी ज़मीन के बेहतर उपयोग के लिए NLMC बनी।

सिक्के का दूसरा पहलू: विनिवेश

विनिवेश का मतलब है सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी बेचना। इसकी शुरुआत 1991 में नरसिम्हा राव (कांग्रेस) सरकार ने की। 1999 से 2004 के बीच वाजपेयी सरकार ने BALCO, VSNL, हिंदुस्तान ज़िंक और मारुति में हिस्सेदारी बेची। 2022 में मोदी सरकार ने एयर इंडिया टाटा समूह को बेच दी।

निष्कर्ष

शुरुआती दशकों में ज़्यादातर बड़े PSU इसलिए बने क्योंकि उस समय निजी क्षेत्र के पास इतनी पूँजी और तकनीक नहीं थी। बाद के दशकों में ज़ोर नई ज़रूरतों, जैसे सड़क, रेल, अंतरिक्ष और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहा। यानी PSU बनाने और बेचने, दोनों का काम हर दौर की सरकारों ने किया है।

साल का मतलब कंपनी या निगम बनने का साल है। यह चुनिंदा सूची है।

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