नेहरू सरकार के समय बने 20 PSU
आज़ादी के समय भारत में न बड़े कारखाने थे, न बिजलीघर, न अपने बैंक और बीमा की मज़बूत व्यवस्था। निजी क्षेत्र के पास इतनी पूँजी और तकनीक नहीं थी कि वह इस्पात संयंत्र या तेल की खोज जैसे बड़े काम कर सके। इसलिए नेहरू सरकार ने सरकारी कंपनियाँ यानी PSU बनाने का रास्ता चुना। नेहरू इन्हें “आधुनिक भारत के मंदिर” कहते थे।
उद्योग और इस्पात
1948 में बेंगलुरु में ITI बनी, जो देश में टेलीफ़ोन उपकरण बनाती थी। 1953 में HMT बनी, जो मशीन टूल्स और बाद में अपनी घड़ियों के लिए मशहूर हुई। 1954 में हिंदुस्तान स्टील (आज SAIL) बनी, जिसने भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर में इस्पात संयंत्र लगाए। 1956 में हेवी इलेक्ट्रिकल्स (आज BHEL) और 1958 में रांची की हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन बनी।
ऊर्जा और खनन
1948 में बाढ़ नियंत्रण, बिजली और सिंचाई के लिए दामोदर घाटी निगम (DVC) बना। 1956 में तेल और गैस की खोज के लिए ONGC, नेयवेली लिग्नाइट और सरकारी कोयला खनन के लिए NCDC बने। 1958 में लौह अयस्क खनन के लिए NMDC और 1959 में पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री के लिए इंडियन ऑयल बनी।
बैंक, बीमा और यातायात
1955 में इंपीरियल बैंक को बदलकर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया बनाया गया, ताकि गाँव-गाँव तक बैंकिंग पहुँचे। 1956 में 245 बीमा कंपनियों को मिलाकर जीवन बीमा निगम (LIC) बना। 1953 में एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस राष्ट्रीय हवाई सेवा बनीं। 1961 में समुद्री माल ढुलाई के लिए शिपिंग कॉर्पोरेशन बना।
रक्षा, जहाज़ और दवा
1952 में विशाखापत्तनम में हिंदुस्तान शिपयार्ड और 1960 में मुंबई का मझगांव डॉक सरकारी हाथ में आया, जहाँ नौसेना के युद्धपोत बनते हैं। 1954 में सेना के लिए रडार और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) बनी। उसी साल पिंपरी में हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स बनी, जिसने सस्ती पेनिसिलिन दवा बनाई। 1951 में सिंदरी फ़र्टिलाइज़र्स ने खेती के लिए खाद बनाना शुरू किया।
आज की तस्वीर
इनमें से कई कंपनियाँ आज भी देश की सबसे बड़ी कंपनियों में गिनी जाती हैं, जैसे SBI, LIC, ONGC, इंडियन ऑयल और BHEL। कुछ कंपनियाँ समय के साथ घाटे में गईं या बंद हुईं, और कई के नाम व ढाँचे बाद में बदले गए। पर देश की औद्योगिक नींव रखने में इन PSU की बड़ी भूमिका रही।

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