नेहरू की किताबें
जवाहरलाल नेहरू केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक लेखक भी थे। उनकी किताबें आज भी इतिहास और भारत को समझने के लिए पढ़ी जाती हैं। ख़ास बात यह है कि उनकी तीन सबसे बड़ी किताबें जेल में लिखी गईं। आज़ादी की लड़ाई में नेहरू कुल मिलाकर करीब 9 साल जेल में रहे।
पिता के पत्र पुत्री के नाम
1928 में नेहरू ने 10 साल की बेटी इंदिरा को करीब 30 पत्र लिखे। इनमें धरती कैसे बनी, जीवन की शुरुआत कैसे हुई और इंसानी सभ्यता कैसे आगे बढ़ी, इसकी कहानी बहुत आसान भाषा में है। बच्चों में विज्ञान और इतिहास के प्रति जिज्ञासा जगाने के लिए यह सबसे सरल किताब मानी जाती है। इसका हिंदी अनुवाद प्रेमचंद ने किया था।
विश्व इतिहास की झलक
1930 से 1933 के बीच जेल में रहते हुए नेहरू ने इंदिरा को करीब 200 पत्र लिखे, जिनमें पूरी दुनिया का इतिहास है। अंग्रेज़ी में यह “Glimpses of World History” के नाम से छपी। इसकी ख़ास बात यह है कि यह दुनिया के इतिहास को यूरोप की नहीं, बल्कि एशिया और भारत की नज़र से देखती है। छात्रों के लिए यह किताब बहुत उपयोगी है।
मेरी कहानी
यह नेहरू की आत्मकथा है, जो उन्होंने 1934-35 में जेल में लिखी और 1936 में छपी। इसमें उनका बचपन, इंग्लैंड में पढ़ाई, गांधीजी का साथ और आज़ादी की लड़ाई के अनुभव हैं। स्वतंत्रता आंदोलन को एक नेता की अपनी नज़र से, अंदर से समझने के लिए यह एक अहम किताब है।
भारत की खोज
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के बाद नेहरू को अहमदनगर किले की जेल में रखा गया। वहीं 1944 में उन्होंने “The Discovery of India” लिखी, जो 1946 में छपी। इसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक काल तक भारत की यात्रा है। भारत की संस्कृति, दर्शन और विविधता को समझने के लिए यह किताब आज भी पढ़ी जाती है।
भारत एक खोज
1988 में मशहूर फ़िल्मकार श्याम बेनेगल ने “भारत की खोज” पर आधारित 53 कड़ियों का धारावाहिक “भारत एक खोज” बनाया, जो दूरदर्शन पर दिखाया गया। इसे भारतीय टेलीविज़न के सबसे बेहतरीन धारावाहिकों में गिना जाता है।
जो लोग इतिहास में रुचि रखते हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए ये किताबें एक अच्छी शुरुआत हो सकती हैं।

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