खेत से खलिहान तक: किसानों के लिए हर PM का काम
आज़ादी के समय भारत अनाज के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था। आज देश 35 करोड़ टन से ज़्यादा अनाज पैदा करता है और 1998 से दूध उत्पादन में दुनिया में पहले नंबर पर है। यह बदलाव कई दशकों की नीतियों और किसानों की मेहनत का नतीजा है। जानिए किस प्रधानमंत्री के समय किसानों के लिए कौन सा बड़ा काम हुआ।
नेहरू (1947–64)
पहली पंचवर्षीय योजना में खेती और सिंचाई पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया गया। भाखड़ा और हीराकुंड जैसे बड़े बांध बने। 1960 में पंतनगर में देश का पहला कृषि विश्वविद्यालय शुरू हुआ।
लाल बहादुर शास्त्री (1964–66)
अनाज की कमी और 1965 के युद्ध के बीच उन्होंने “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया। 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), भारतीय खाद्य निगम (FCI) बने और फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था की नींव पड़ी।
इंदिरा गांधी (1966–77, 1980–84)
उनके समय हरित क्रांति आई। अधिक उपज वाले बीजों, सिंचाई और खाद से गेहूँ का उत्पादन कुछ ही सालों में लगभग दोगुना हो गया। 1970 में ऑपरेशन फ्लड शुरू हुआ, जिसने भारत को दूध में आत्मनिर्भर बनाया। 1982 में किसानों और गाँवों को कर्ज़ देने के लिए नाबार्ड बना।
राजीव गांधी (1984–89)
1986 में तिलहन टेक्नोलॉजी मिशन शुरू हुआ, जिसे “पीली क्रांति” कहा गया। इससे खाद्य तेल के उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी हुई।
अटल बिहारी वाजपेयी (1998–2004)
1998 में किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू हुई, जिससे किसानों को आसानी से कर्ज़ मिलने लगा। 1999 में राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना आई।
मनमोहन सिंह (2004–14)
2007 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना शुरू हुई। 2008 में किसानों की बड़ी कर्ज़ माफ़ी हुई, और 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून बना, जिससे गरीबों को सस्ता अनाज मिलना कानूनी हक़ बन गया।
नरेंद्र मोदी (2014 से)
2015 में सॉयल हेल्थ कार्ड योजना आई, जिससे किसान अपनी मिट्टी की जाँच करा सकते हैं। 2016 में प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना शुरू हुई, और 2019 से PM-किसान योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6,000 सीधे बैंक खाते में मिलते हैं।

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