ISRO के बड़े मिशन, हर PM के दौर में
1963 में केरल के एक छोटे से गाँव थुम्बा से भारत का पहला रॉकेट छोड़ा गया था। आज भारत चाँद, मंगल और सूर्य तक पहुँच चुका है। यह सफ़र किसी एक सरकार का नहीं, बल्कि दशकों की मेहनत और वैज्ञानिकों की लगन का नतीजा है।
शुरुआत: नेहरू और इंदिरा गांधी का दौर
1962 में अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) बनी और 1963 में थुम्बा से पहला रॉकेट छोड़ा गया। 1969 में ISRO की स्थापना हुई। 1975 में भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट अंतरिक्ष में गया। 1980 में SLV-3 रॉकेट से भारत ने अपने ही रॉकेट से पहला उपग्रह रोहिणी छोड़ा। 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने।
मज़बूत नींव: 1979 से 2001
1979 में मोरारजी देसाई सरकार के समय भास्कर-1 उपग्रह छोड़ा गया। 1988 में राजीव गांधी सरकार के समय पहला रिमोट सेंसिंग उपग्रह IRS-1A गया। 1994 में नरसिम्हा राव सरकार के समय PSLV की पहली सफल उड़ान हुई, जो आगे चलकर ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट बना। 2001 में वाजपेयी सरकार के समय GSLV की पहली उड़ान हुई।
चाँद और मंगल: 2008 से आज तक
2008 में चंद्रयान-1 ने चाँद पर पानी के सबूत खोजे। इसकी घोषणा 2003 में वाजपेयी ने की थी और लॉन्च मनमोहन सिंह सरकार में हुआ। मंगलयान 2013 में मनमोहन सरकार में लॉन्च हुआ और 2014 में मोदी सरकार के समय पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा में पहुँचा। 2017 में ISRO ने एक ही रॉकेट से 104 उपग्रह छोड़कर रिकॉर्ड बनाया। 2023 में चंद्रयान-3 चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरा और सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य-L1 मिशन लॉन्च हुआ। 2025 में SpaDeX मिशन से अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को जोड़ने (डॉकिंग) में सफलता मिली, और शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुँचे।
आगे क्या?
भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान तैयारी में है। इसका पहला मानवरहित परीक्षण 2026 के आख़िर तक होने की उम्मीद है। इसके बाद भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अपने रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजने वाला देश बनेगा।

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