1 डॉलर = कितने रुपये? 1947 से 2026
सोशल मीडिया पर अक्सर कहा जाता है कि 1947 में 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था। यह बात सही नहीं है। आज़ादी के समय रुपया ब्रिटिश पाउंड से जुड़ा था और 1 डॉलर करीब ₹3.30 का था। आज, अक्टूबर 2026 में, 1 डॉलर करीब ₹94.92 का है। जानिए हर प्रधानमंत्री के दौर में डॉलर का भाव क्या रहा।
सालवार भाव (लगभग, सालाना औसत)
1947 में ₹3.30 और 1964 में ₹4.76 (नेहरू)। 1966 में ₹7.50 और 1975 में ₹8.38 (इंदिरा गांधी)। 1984 में ₹11.36 और 1989 में ₹16.23 (इंदिरा और राजीव गांधी)। 1991 में ₹22.74 और 1996 में ₹35.43 (नरसिम्हा राव)। 1998 में ₹41.26 और 2004 में ₹45.32 (वाजपेयी)। 2014 में करीब ₹61 (मनमोहन सिंह से मोदी)। और 2026 में ₹94.92 (मोदी)।
दो बड़े अवमूल्यन
1966 में इंदिरा गांधी सरकार ने रुपये का अवमूल्यन किया और 1 डॉलर ₹4.76 से बढ़कर ₹7.50 का हो गया। 1991 में विदेशी मुद्रा संकट के समय नरसिम्हा राव सरकार ने रुपये को करीब 18 प्रतिशत सस्ता किया। दोनों बार यह फ़ैसला सरकार ने खुद लिया था।
रुपया क्यों गिरता है?
भारत तेल और दूसरा सामान जितना बाहर से मँगाता है, उतना बेचता नहीं, इसलिए डॉलर की माँग ज़्यादा रहती है। भारत में महँगाई अमेरिका से ज़्यादा रहती है, जिससे रुपये की कीमत घटती है। जब विदेशी निवेशक शेयर बाज़ार से पैसा निकालते हैं, तब भी रुपया कमज़ोर होता है। दुनिया भर में डॉलर की मज़बूती का असर भी पड़ता है।
कमज़ोर रुपये का दूसरा पहलू
कमज़ोर रुपया हमेशा नुकसानदेह नहीं होता। इससे भारत से सामान बेचने वाले निर्यातकों को ज़्यादा कमाई होती है, और विदेश में काम करने वाले भारतीय जब घर पैसा भेजते हैं तो उनके परिवार को ज़्यादा रुपये मिलते हैं। नुकसान आयात करने वालों को होता है, जैसे पेट्रोल, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स महँगे होते हैं।
भाव RBI के आँकड़ों और 19 अक्टूबर 2026 के बाज़ार भाव पर आधारित हैं।

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